मधुकर गौड़ एक व्यक्ति का नाम नहीं है। वह एक संस्था हैं, एक सजीव आंदोलन, एक
शिव संकल्प से प्रेरित अभियान, एक मिशन का नाम है। वह साहित्य जगत का नया
भगीरथ हैं। जहां तक गीतों में प्रशंसनीय लाक्षणिक शब्दों, अनुपम उपमाओं तथा नूतन
अभिव्यंजनाओं आदि का संबंध है, वे इतनी अधिक हैं कि गीतों के क्षितिज को बहुत
व्यापक बना देती है और उनका उल्लेख मात्र करना कठिन है। -प्रो.उदयभानु हंस (हिसार)