महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी से दो बार काव्य के सर्वोच्च पुरस्कारों से पुरस्कृत। राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर से विशिष्ठ साहित्यकार सम्मान। राजस्थानी भाषा, साहित्य, संस्कृति अकादमी बीकानेर से काव्य का सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त। ५१ हजार रू. का महावीर प्रसाद जोशी पुरस्कार, अक्टूबर २०१६ हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से ‘साहित्य सारस्वत’ सम्मान एवं अन्य अनेक पुरस्कार
मधुकर गौड़ का सार्थक साहित्य
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मधुकर गौड़: साहित्य साधकों की दृष्टि में

  • भारत के जिन सुधी रचनाकारों ने गीत के लिए काम किया है, उनमें आपका नाम और काम गीत के इतिहास में सुरक्षित होगा। - रामनाथ अवस्थी (नई दिल्ली)
  • गीत लेखन की दिशा में मधुकरजी के प्रयास उल्लेखनीय हैं। गीत जैसी सशक्त विधा के लिए उपयुक्त वातावरण बनाने में इनका साहस अप्रतिहत है। आपके गीतों के शर संधान ‘नये अर्जुन’ की परिभाषा सार्थक करेंगे। - वीरेन्द्र मिश्र (दिल्ली)
  • भाई मधुकर गौड़ की हर कविता पढ़कर मैं फड़क उठता हूं। काव्य में क्या तीखापन, क्या आदर्श और कितनी ईमानदारी होनी चाहिए तथा कहने का क्या अंदाज होना चाहिए यह जानना हो तो मेरी राष्ट्रभाषा के काव्य-प्रेमियों से प्रार्थना है कि ‘समय के धनुष’ की कविताएं पढ़ें और निर्णय करें कि आधुनिक कविता का क्या स्वरूप हो। मैं स्वयं कवि होने के नाते इन कविताओं से इतना प्रभावित हुआ हूं कि मेरी लेखनी भी यही पथ पकड़ना चाहती है। - पं.भरत व्यास (मुंबई)
  • मधुकरजी भावना से, समर्पण से, परिश्रम से केवल गीत के लिए जी रहे हैं ऐसी निष्ठा बहुत कम होती है। गीत को जीवंत रखने के लिए ऐसी ही तपस्या चाहिए भी। यही उनके व्यक्तित्व का अमरत्व भी है। ऐसे ही व्यक्ति गीत को जीवन देंगे। - भारत भूषण (मेरठ)
  • ‘गीत नवांतर’ के माध्यम से आपने जो बहस छेड़ी है, उससे मैं पूरी तरह सहमत हूं। गीतों के संबंध में जो भ्रामक धारणायें हैं, आपने वे सब समाप्त कर दी है। - गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ (अलीगढ़)
  • मधुकर गौड़ एक व्यक्ति का नाम नहीं है। वह एक संस्था हैं, एक सजीव आंदोलन, एक शिव संकल्प से प्रेरित अभियान, एक मिशन का नाम है। वह साहित्य जगत का नया भगीरथ हैं। जहां तक गीतों में प्रशंसनीय लाक्षणिक शब्दों, अनुपम उपमाओं तथा नूतन अभिव्यंजनाओं आदि का संबंध है, वे इतनी अधिक हैं कि गीतों के क्षितिज को बहुत व्यापक बना देती है और उनका उल्लेख मात्र करना कठिन है। -प्रो.उदयभानु हंस (हिसार)
  • जहां जहां गीत और गीतकारों का प्रसंग चलता है, वहां-वहां श्री मधुकर गौड़ का संदर्भ और उल्लेख अब तक अनिवार्यतः बन चुका है। वे वज्न-निश्चय के धनी हैं जो कह दिया, सो कह दिया जो ठान लिया सो ठान लिया; फिर चाहे कोई भी प्रत्यवान या कैसा भी अंतराय आये, वे अपना ‘कथितम् को सुकृत्म’ के रूप में परिणत करके ही चैन की सांस ले पाते हैं। वे स्नेहामृत से भरे एक ऐसे उदार-मेदुर मेघ हैं जो अपनी वर्षा से नीरस और मूक शिलाखंड को भी सवाक और सस्य श्यामल बना सकते हैं। - देवेंद्र शर्मा ‘इंद्र’ (गाजियाबाद)
  • मधुकरजी की सांसों में गीत बसा हुआ है। वे गीत के भाव जगत को जीते हैं। गीतलता का अमृत कुंड उनकी नाभि में बसा हुआ है। इसी कारण उनका सारा लेखन, संपादन, पत्रचार, संवाद और यहां तक कि निजी दिनचर्या भी गीतमयी हो जाती है। - महेश अनघ (ग्वालियर)
  • सृजनशील-कवि तथा कुशल संपादक के रूप में हिंदी जगत को मधुकर गौड़ का अवदान स्तुत्य है। आप केवल गीत की ही नहीं समूची कविता के अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। – माहेश्वर तिवारी (मुरादाबाद)
  • मधुकर गौड़ की साहित्य साधना एवं उनके छंदबद्ध काव्य के प्रति प्रेम के आगे मैं नतमस्तक हूं। हिंदी गीत एवं छंदबद्ध कविता के समर्थन में कार्य करने वाले कितने ही रचनाकार हैं। उनमें प्रथम पंक्ति में आने वाले रचनाकारों में आपका नाम सम्मानपूर्वक लिया जाता है और आगे भी लिया जाता रहेगा। - कुंवर बेचैन (गाजियाबाद)
  • समकालीन गीत रचना के यशस्वी गीतकार मधुकर गौड़ उन्नति-शील गीतधारा के सक्रिय सृजन शील एवं मधुर प्रसूति के धनी रचनाकार हैं। मुंबई अर्थ निष्ठ महानगर में स्तरीय साहित्य-चेतना की मशाल जलाये रखने वाले साहित्य के अजय-योद्धा के स्वर आज राष्ट्रीय स्तर पर गूंज रहे हैं। यह मधुकरजी की खास रचनात्मक उपलब्धि है। इन्हें मैं छादंस-यज्ञ का पुरोहित मानता हूं। - श्रीकृष्ण तिवारी (बनारस)
  • मधुकर गौड़ ने देशभर के तमाम गीतकारों के माथे पर चंदन लगाया है और हिंदी काव्य मंच की गरिमा को बनाये रखने में वर्षों संघर्षरत रहे हैं। मधुकर गौड़ के ये प्रयास भांग के जंगल में तुलसी के बिरवे की तरह है।- डॉ. राम मनोहर त्रिपाठी (मुंबई)
  • मधुकर गौड़ से जुड़ने का मतलब है पूरी गीत परंपरा से जुड़ना। भाई मधुकर गौड़ मानुषी आस्था के गीतकार हैं और उस आस्था में ललकार है रिरियाहट नहीं। ओज उनका मूलभाव है। - कुमार रवींद्र (हिसार)
  • मधुकर गौड़ का संपूर्ण रचनात्मक संघर्ष गीत की अस्मिता और अस्तित्व की प्रतिरक्षा में सक्रिय सृजनात्मक संघर्ष हैं और गीत विरोधियों के खिलाफ प्रतिरोधात्मक कार्यवाई का दायर संजीदा हलफनामा और गीत के नये मूल्यांकन का घोषणापत्र है। - नचिकेता (पटना)
  • मधुकर गौड़ खुरदरी-सी खुद्दारी वाला व्यक्तित्व है। जो मन में आता है छिपाकर रखना नहीं जानते। जो सही लगता है उसके लिए अड़ जाते हैं। मुझे उनका यह अक्खड़पन पसंद है। गीत के प्रति उनकी आस्था न कच्ची है न गलत। जब तक हिंदी साहित्य में तुलसी मीरां का काव्य है और मधुकर गौड़ जैसे लगनशील और जिद्दी गीतकार हैं तब तक गीत की यात्रा इसी तरह से प्रवाहमान रहेगी। - विश्वनाथ सचदेव (मुंबई)
  • गीत के तमाम प्रयासों में मेरुदंड का काम यदि किसी ने किया है तो वह है गीत के प्रति संपूर्ण रूप से समर्पित गीतकार मधुकर गौड़। गीत के पुर्नस्थापना के लिए श्री गौड़ की निष्ठा ने इनको वह कद अदा किया है कि दूर-दूर तक उसका कोई सानी नहीं है। मधुकर गौड़ अब एक नाम नहीं संस्था हैं। - मुकुट सक्सेना (जयपुर)
  • मधुकर गौड़ लगभग चार दशकों से नई कविता और उसके कवियों द्वारा झिझोड़े जाने, और यहां तक कि उसके मर जाने तक की कुचर्चा फ़ैलाने के दुखद दौर में भी गीत जिंदा है नहीं, बल्कि वह अमर है, इसका लाजवाब सबूत देते आ रहे हैं। मधुकर गौड़ गीत रचने से पहले उसे जी लिये लगते हैं - ऐसे अक्स उनके गीतों में हैं जो सीधे सामाज के संवेदन से मिल जाने की क्षमता रखते हैं। उनके गीतों में मानवीय मूल्यों के प्रति गहरी आस्था, जीने के प्रति अटूट साहस और विश्वास तथा सामाजिक विद्रुपताओं के प्रति प्रायः पैना व्यंग्य है। भाषिक सरलता से संप्रेषण इतना सहज है कि समझ रीझती है उससे, उस पर। - डॉ.जीवन प्रकाश जोशी (दिल्ली)
  • आपकी रचनाओं में समय की दरारों का बहुत रोमांचक वर्णन है। वे हमारे समय के मिजाज को बताती हैं । - डॉ. नंद चतुर्वेदी (उदयपुर)
  • वरिष्ठ पीढ़ी के उन गीतकारों में जो निरंतर लिखते चले आ रहे हैं और जिन्होंने सभी गीत आंदोलनों के प्रभाव को अपने में समेटा है उनमें मधुकर गौड़ का नाम बड़े आदर एवं आस्था के साथ लिया जाता है। ‘ईमानदार शब्दों में, ईमानदार मन की, ईमानदार अभिव्यक्ति’ इस एक पंक्ति में उनके गीतों की व्याख्या है।- डॉ. किशोर काबरा (अहमदाबाद)
  • मधुकर गौड़ की कविताएं यथार्थ आंकती हैं और झूठ के विरुद्ध सच का शंखनाद करती है। - डॉ. रवींद्र उपाध्याय (मुजफ्फरपुर)
  • वाणी का अर्चन करनेवाले इस गीतकार ने जिस तटस्थ भाव से अपने साहित्यिक एवं संपादकीय दायित्व को निभाया है उसी ईमानदारी से अपने गीतों की आत्मनुशासित मर्यादाओं से बाहर कभी भी नहीं जाने दिया बड़े-से-बड़ा साहित्यिक लोभ उन्हें पथ भ्रष्ट नहीं कर पाया। मधुकर गौड़ का सार्थक हस्तक्षेप उनके पिछले और वर्तमान संग्रहों में लगातार उनकी उपस्थिति से हमें आश्वस्त करता है। - शंकर सक्सेना (झाबुआ, म.प्र.)
  • एक पूरा जीवन अपने तमाम अनुभवों के साथ आपकी रचनाओं को पूर्ण बनाता हुआ विद्यमान है। भारतीयता की जितनी पहचान हो सकती है वे सब मधुकर गौड़ के गीतों में आयी हैं। - हृदयेश मयंक (मुंबई)
  • मधुकर गौड़ की व्यष्टि में समष्टि का पूर्ण समाहार हो गया है। व्यष्टि में समष्टि की ध्वनि है, गूंज है। वाणी में ओज तथा निर्भीकता स्पष्ट झलकती है। वे सचमुच मानुषी- भावों के पारखी और बेजोड़ चितरे हैं। - डॉ. त्रिलोकनाथ ‘प्रेमी’ (आगरा)